Thursday, December 28, 2017

निरुत्तर

आज एक पंजाबी मूवी देख रही थी ( सरदार मोहम्मद) जिसमें नायक को २५ बरस की उम्र में मालूम होता हैं कि वो वर्तमान माँ पिता की असल संतान नही हैं किसी और की संतान हैं और उसका पालन पोषण इस घर में अपना बच्चा बना कर अच्छी तरह किया गया हैं ..ना चाहकर भी उसका मन टूट जाता हैं और उसका मन अपने असल माता से मिलने को आतुर हो उठता हैं
भावुक पल थे उस मूवी में तो मैंने यूँ ही अचानक अपने छोटे बेटे स्नेहिल को कहा ........अगर कभी तुमको यह कहे कोई कि तुम इनकी संतान नही adopted हो तो तुम्हारा क्या रिएक्शन होगा
स्नेहिल झट से बोला .मम्मी मेरी सूरत भैया से बहुत मिलती हैं और भैया एकदम पापा जैसा हैं .आप अपना सोचो कहीं कोई यह ना कह दे कि आप ही सौतेली मम्मी तो नहीं हो ..................
सोचो तो तब मेरी सूरत देखने लायक रही होगी .......
यह बच्चे भी ना आजकल माता पिता को
निरुत्तर कर देते हैं
वैसे गलत शुरुवात मैंने ही की थी

7 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (30-12-2017) को "काँच से रिश्ते" (चर्चा अंक-2833) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
क्रिसमस हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, ख़ुशी की कविता या कुछ और?“ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Onkar said...

बहुत खूब

Kavita Rawat said...

आजकल के बच्चे कितने सयाने होते हैं इसका अंदाज लगाना आसान नहीं
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

Pammi said...

आपकी लिखी रचना  "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 3 जनवरी2018 को लिंक की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!


Shalini Kaushik said...

बहुत सुन्दर

Amrita Tanmay said...

रोचक उत्तर बेटे का ।