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Wednesday, October 9, 2013

दिल के अरमान आंसू में बह गये

खट से जो दरवाज़ा खोला सामने तुम थे , मुह ढक कर सोये से ,दिल से जोर से धड़क उठा , हाथ  कंपाने लगे  आँखे भर आई , कितने दिन बाद तुमको देखा ना  सबकी जिद थी तुमसे दूर रहू   कोशिश भी बहुत की  पर तुम बहुत शिद्दत से याद आये , चुपके चुपके तुमको याद करती थी  पर डरती थी किसी को भी कहते कि  मुझे तुम्हारी याद आ रही हैं  तुमने भी शिद्दत से याद नही किया मुझे  वरना शाहरुख़ कहता हैं न  ज़र्रे  ज़र्रे  ने मिलाने की साजिश की हैं मुझे तो तुमसे दूर करने की साज़िशे  रची इस कमबख्त दुनिया ने , बहुत चाह तुम्हे मैंने . दिल किया जल्दी से तुम्हे छु लू भर लू बाहों में  चूम लू तुम्हारा माथा ,भूल जाऊ सुध - बुध , खोजाऊ असीम आनंद में तुम्हारे संग  वक़्त का पता ही न चले कब हम एक दुसरे के करीब आये ,हर भाव मन के मैंने तुमसे शेयर किये  प्यार वाले भी और उनसे हुए झगडे  वाले भी , सच्ची कसम से  तुम मुझसे अलग नही . बेवफा !! तुमको मेरी क्या परवाह तुम्हे कोई भी अपना ले उसके हो जाते हो पर तुम्हे मेरे अलावा कोई और छु दे तो  मेरा दिल
घबराता हैं , कितना अजीम है न तेरा मेरा रिश्ता ,तुम्हारे दुसरे रूपों ने मुझे लुभाने की कोशिश की पर सिर्फ तुम्हारी दीवानी हूँ , तुम्हे और भी मिल जायेंगे साथ !! पर ..मेरा क्या होगा ? कभी सोचा .. मेरे अकेलेपन के तुम्ही सहारे हो साथी हो ..जाओ मत बनाओ न मुझे अपना आदि ,इतना एडिक्शन अच्छा नही न तेरा ,
  अच्छा प्रॉमिस पहले की तरह नही आऊंगी तुम्हारे करीब , पक्का  पर अहसान मंद हूँ तुम्हारी  तुमने मुझे मेरी इनर सोल से जो मिलवाया  सुन!! अब नही रहा जा रहा मुझसे  इतने दिन बाद मिली हूँ  तो ... कुछ न कुछ तो लिखना बनता है न मेरा तुझको ,तुझपर,
अब आते जाते नजर जो पढ़ रही हैं तुम पर  .इतने दिन की छुटिया बिता कर आई हूँ   .. आओ न तुम भी बताओ न मेरे पीछे  क्या क्या हुआ ?

 अरे बेटा  !!! जरा इस कंप्यूटर को मेरे कमरे  में रख दो और  वाई-फाई  बंद कर दो
 वरना यह नीलिमा फिर से फेसबुक खोल कर निविया बन जायेगी और खो जायेगी उसी दुनिया में !!! ...:D




दिल के अरमान आंसू में बह गये  .हम कंप्यूटर के प्रेम में तनहा रह गये उफ्फ्फ मेरा कंप्यूटर !!! और मेरा उसके साथ प्रेम सबको इतना चुभता क्यों हैं ?

Thursday, August 8, 2013

ईद मुबारक आपको .तीज मुबारक मुझको

 जानते भी हो कल क्या हैं !!! ईद हैं ईद ! आपका  जन्मदिन  इसी दिन हुआ था न  बाबा आपको  इदू कहकर पुकारते थे    माना कि हम हिन्दू हैं  पर इस दिन सेवइयां तो जरुर बनती हैं हमारे यहाँ .आ जाओ न  जल्दी से 
 और हाँ कल तीज भी हैं  , यह भी हमारे यहाँ नही मनाई जाती हैं पर मुझे हर साल  चूड़ियाँ तो दिलाते हो न आप और मेरे हाथो में मेहंदी भी  रचती हैं  ... ले आई हूँ मैं बाजार से चूड़ियाँ।।हाँ!  धानी रंग की ही  और मेहंदी का कोन भी .और सामने रखे सोच रही हूँ  तुम तो नही आओगे तो क्या फायदा मेहंदी का चूडियों का ..... रख देती हूँ अलमारी मैं .......जब तुम आऊगे न उसी दिन  सेवइयां भी बना लूंगी  और चूडियाँ भी पहन लूंगी मेहंदी लगाकर .......... अब नौकरी करनी हैं आपको तो क्या  मेरे नखरे , मेरे त्यौहार ( सरकार के खाते में भावनाओ की कदर नही )  जाओ कराओ अपने ऑफिस का निरीक्षण अपने  अधिकारियो  से :((
ईद मुबारक आपको .तीज मुबारक मुझको 

Saturday, June 15, 2013

पापा

पापा  
 जितनी बाते  तुमसे लिख कर करती हूँ  उतनी कभी सामने खड़ी  होकर नही कर पाती हूँ  आपने इतने कड़े अनुशासन से हम सबको पाल पोस कर बड़ा किया  की आज भी हम जब कोई काम करने लगते हैं तो एक ख्याल जहन  में उभर आता हैं की आपको बुरा तो नही लगेगा  फिर याद karte kei उफ़ अब हम अपने घर में हैं   आपका हमें डांटना कि बिना दुपट्टे के घर से बाहर नही जाना  , कॉलेज से सीधे घर आना , पैसे का हिसाब रखा करो  जब आज याद आता हैं तो ना जाने कितनी बाते कभी मुसकराहट  लेकर मेरे जहन  में उभर आती है तो कभी आंसुओ की झड़ी लग जाती हैं 
                                                                   पापा आज आप उम्र के आखिरी पड़ाव पर हो  ८२  साल की उम्र में आप बहुत एक्टिव हो  , पर उम्र के साथ साथ आप जिद्दी बहुत हो गये हो  आप नही जानते अब आपकी जिद के मायने बदल गये हैं आप घर सिर्फ आपका नही  .नयी generations
भी हैं जिन्हें अपनी शर्तो पर जीना आता हैं  आप अब थोडा सा अपना अफसरी रुआब छोड़ कर एक दादू नानू  की तरह  जियो न आप हमारे बच्चो से इतना प्यार करते हो परतु हमारे लिय उतना प्यार क्यों नही प्रदर्शित करते हो  शायद आप उस पीढ़ी से हो जहाँ पिता अपनी संतान से अपने मत पिता के सामने प्यार का प्रदर्शन नही करते थे और आपने इस बात को कही गहरे तक आत्म सात कर लिया  और मन में ढेर सारा प्यार होते हुए भी उसे लफ्जों में बयां कर पाना आपके लिय नामुमकिन हो जाता हैं ...
 जानती हूँ पिछली बार जब मेरी तबियत ख़राब हुयी थी तो आप कितना घबरा गये थे आपका बस एक ही वाक्य था  तुम ठीक तो हो न .तुम्हारी  माँ  को भेजू क्या तुम्हारे पास  . ... . बस आपका इतना कह देना ही मेरे लिय काफी हो गया था 
 आज जब अपने बच्चो को पापा के साथ मस्ती करते देखती हूँ सब छोटी बड़ी बाते शेयर करते देखती हूँ तो कभी कभी मन उदास हो जाता हैं तब यह मुझे समझाते हैं की तुम्हारे पापा  ने आज तुम सबको -भाई  बहनों को जो दिया उसकी कदर करो जो नही दे पाये उसका मलाल नही . हर पिता अपनी संतान के लिय सर्वश्रेष्ट  करता हैं  आज हम भी parents हैं हम अपनी तरफ से बेस्ट karte हैं क्या पता कल हमारे बच्चे भी हमें कहे कि  आपने यह नही किया था यह क्यों किया था . उनके  दिल को पढो .जरुरी नही हर कोई अपने प्यार को स्नेह को लफ्जों में कह पाए  उनकी भावनाए बहुत अच्छी रही हैं

       अब वक़्त नही  मिलता की पहले की तरह आपके आस पास रहे  आपको छोटे छोटे फुल्के बनाकर खिलाये   फिर भी जब जब घर में बेसन की सब्जी बनती हैं या पकोड़े बनते हैं आपकी याद आती हैं 
                                                    जानती हु आज आप बेटे बहुओ  पोते पोतियों से घिरे हुए  होगे और सब बारी बारी से भापा जी  हैप्पी फादर  डे  कह रहे होंगे बस आप महसूस कर लेना एक आवाज़ मेरी भी है .......... 

 इश्वर से बस यही पार्थना करती हूँ  के आप जब तक जिए सबकी ख़ुशी का कारण  बने रहे , आत्मसम्मान के साथ जिए  उसी शान से जिए जिसके आप आदि रहे हैं  मेरे और बच्चो की तरफ से आपको ढेर सारा प्यार  

Saturday, May 11, 2013

आज माँ-दिवस हैं !!!


माँ!!! 
 तुम्हे तो पता भी नही होगा आज माँ-दिवस हैं  .जब सुबह बहुए आकर पैर छू  कर कहेगी मम्मी  हैप्पी मदर डे  तब तुम मुस्स्कुराकर कहोगी  तुम को   भी ... माँ हमारे ज़माने कहा होता था यह दिन ? आज तुम गिफ्ट लेकर जब बच्चो सी खुश होती हो और  हमें फ़ोन पर बताती हो के इस बार मुझे मदर डे पर गिफ्ट मिले तो लगता हैं जैसे कोई बचपन चहक रहा हैं  
                                                                    जानती हो तुमको बहुत मिस करती हूँ .जब जब किचन में खाना बनती हूँ  तो मेवी  कहता हैं माँ आप अच्छा  खाना बनाती हो पर बड़ी मम्मी जैसा नही  . मेरे  मेवी एक दिन को ही क्यों ना जाए तुम्हारे हाथ के आलू के पराठे खाना नही भूलता  और खासकर जब तुम घी में भिगोकर उन पराठो का पहला कौर अपने हाथ से उसको खिलाती हो  घर आकर न जाने कितने दिनों तक उसका यही राग चलता हैं की बड़ी माँ यह करती बड़ी माँ वोह करती हैं .....सारा दिन मेरे पास बैठ कर पूछता हैंकी जब आप छोटी थी तो बड़ी माँ कैसी  थी क्या करती थी कैसे करती थी ?  मसाले वाले बैंगन हो या  बेसन की सब्जी ......लस्सी हो या साग .....पता नही क्या जादू होता था तुम्हारे हाथो में कि  बिना लहसुन प्याज का खाना भी आज के बड़े बड़े शेफ्स  को मात कर दे ...


 तुम कैसे कर जाती थी इतना काम .हम ७ भाई - बहन .सबके सब एक से बढ़कर एक शैतान  पर तुम्हारा अनुशासन ........ एक ही सब्जी बनेगी और हम सब भाई बहन बिना आवाज़ किये तब लौकी तो री टिंडे खा जाते थे कोई नखरा नही  और आज घर में तीन लोग हैं  और सब्जी चार तरह की बनती हैं ...फिर भी हमारे बच्चे उतना ग्लो नही करते जितना हम करते थे उस ज़माने में 
 कल मैंने मेवी को डांट दिया कि  कितना परेशान कर रखा बच्चो ने .जरा भी चैन नही तो थोड़ी देर बाद मेरे पास आ  कर  बोल पढ़ा कि बड़ी माँ वास ग्रेट  आप जैसे ७ बच्चे पाल  दिए और आज भी हैप्पी हैं  एक आप से हमारे जैसे २ बेटे नही सम्हाले जा रहे ....अगर ज्यादा परेशान हो तो बड़ी माँ को बुला लो कुछ दिन के लिय ... 

   एक बात बताओ माँ .पापा ने इतना पैसा कमाया पर तुमने कभी देखावा नही किया सिंपल सा खाना सिंपल से कपडे पहन ने   ........कभी किसी चीज से ज्यादा लगाव नही बस हाँ जानती हूँ तुमको घूमने का बड़ा शौंक था धार्मिक पर्यटन  का पापा के साथ अगर कही धार्मिक  पर्यटन पर जाना होता तो आप भूल जाती की मेरे एग्जाम चल रहे हैं बड़ी बहने  घर सम्हाल लेती थी और आप गंगा सागर बद्री नाथ केदार नाथ  न जाने कहा घूम आती  थी  मैं गुस्सा होती तो कहती की मैं जानती हूँ तुम पढ़ लोगी खुद ही पता नही बुदापे में इस लायक रहे भी या नही .अभी जितना भगवन जी से मिलना हो मिल आओ फिर तो उनको ही बुलावा देते रहना होगा कि कब मिलने आओगे ? 

सच में आज भी तुम जैसे पूजा नही कर पाती तुम्हारा फरमान कि  अगर नहाना नही सुबह तो नाश्ता नही मिलेगा .कई बार जिद में मैं  नाश्ता नही करती  मुझसे सुबह सुबह नही नहाया जाता .आप भी अपने वचन की पक्की थी मुझे सीधा लंच ही मिलता था नहाने के बाद  .आज जब केवी मेवी को सु बह उठ ते ही नहाने को कहती हूँ तो अपने को जैसे आईने के सामने पाती हूँ 


 आप का डांटना कि  सब काम सीखो .......ना जाने कैसे घर में विवाह हो  और पूरा घर अपने बल पर  सम्हालना पड़े  काम अच्छे लगते हैं चाम नही  जिस घर में जा ओगी लोग चार दिन चाम ( स्किन  ) देखेंगे उसके बाद काम ही परखेंगे  ....


 माँ आज मन करता हैं तुम्हारे पास आकर कुछ दिन रहू  पर क्या करू कुछ मेरी मजबुरिया घर परिवार  और कुछ अब तुम्हारे घर का बदला हुआ सा वातावरण ..भाई भाभिया  और तुम अब उनकी जैसे ज्यादा हो गयी हो .   अब कैसे  रह सकती हूँ  ....मेरा मन ही नही लगता . फिर तुम गुस्सा करती हो कि के बिगड़ गयी हो ससुराल जाकर ....स्वतंत्र ने सर पर चढ़ा  कर रखा हुआ हैं तुझे !! तब सब जोर से हस देते हैं पर मेरी आँखे अन्दर तक भीग जाती हैं .
                                     जानती हो तब तुमसे कितनी बहस करती थी मैं हर बात पर  .और अगर आज मुझे कोई तुम्हारी जरा सी भी शिकायत करता हैं तो मुझे बहुत जोर से गुस्सा आता हैं 
.माँ अब तुम आखिरी पायदान पर हो उम्र की सब ऐसे क्यों कहते हैं  मैं तो चाहती हूँ के तुम उम्र भर मेरे सर पर चांदनी से बिखरीरहो जरा भी परेशानी हो  जरा भी ख़ुशी हो झट से तुम्हारा नंबर मिलाउ और बात कर लू 

 पता हैं कल रात मेवी बोला कि माँ आपको नींद नही आरही ना तो अपने तकिये पर अपनी माँ का नाम लिखो अच्छे से नींद आएगी .और मैंने उसका मान रखने को तुम्हारा नाम लिखा " " विद्या ""   और सच मानो कल रात  इतने सुकून की नींद आई 
 जैसे तुम मुझे थपकी देकर सुला रही हो 


माँ खुश रहा करो इतने सारे नाती पोते ../ पोतिया हैं न चारो तरफ जो तुम्हे तुम्हारे बच्चो से भी ज्यादा प्यार करते हैं .बड़ा अच्चा लगता हैं बच्चो के संग तुमको ठहाके लगते हुए देखना 

 और हाँ अबकी बार मैं जब आऊंगी ना .मुझे बेसन  की सब्जी खानी हैं तुम्हारे हाथ की और.आलू बड़ी की सब्जी ........

 इंतज़ार कर रही हो ना ...कभी आज तक शब्दों में तो नही कहा ....... पर यहाँ लिख रही हूँ ..माँ मुझे तुम से बहुत प्यार हैं मुझे मेरी गलतियों के लिय क्षमा करना जो बचपने में अक्सर कर जाती थी आज खुद माँ बनकर आपकी भावनाए ज्यादा अच्छे से समझ पा रही हूँ    
 बस इश्वर तुमको अच्छी  और सुकून भरी जिन्द्दगी दे जब तक जीना  स्वाभिमान से जीना ... आपका साया हमें हमेशा प्यार देता रहे 

Monday, April 29, 2013

ओये तू कब बड़ा होगा ?

सुबह सुबह उठो बेटे के लिय टिफ़िन बनाओ जब तक स्कूल न चला जाए उसके चारो तरफ घुमते रहो कि मम्मा रुमाल कहा गया? आज यह वाला बैग नही ले जाना , अरेय मेरी इंग्लिश की बुक कहा गयी यहाँ ही तो रखी थी मम्मा जाओ न गेट का लॉक तो खोलो जल्दी से और मेरी साइकिल भी गेट के पास तक ले आओ जरा प्लीज़ !!!
कभी कभी बड़ी खीझ सी होती हैं की इत्ता बड़ा हो गया फिर भी मम्मा को लॉकेट बनाकर हर वक़्त गले में लटकाए रखना चाहता हैं बस आज सुबह मैंने भी धमकी दे दी कि मैं तो जा रही हूँ कुछ दिन
के लिय दिल्ली ,तुम्हारे पास अब बुआ रहेगी कुछ दिन ......


अभी बेटे के जाने के बाद चाय का मग लेकर जैसे ही कमरे में आई तो लंच बॉक्स और ढूध का गिलास वैसे ही उसकी टेबल पर रखे हैं . साथ में एक चिट भी " बुआ को कोई फर्क नही पड़ेगा " मेवी " ने स्कूल लंच में क्या खाया क्या नही बस एक बार डांट देगी के लंच बॉक्स क्यों नही ले गया , पर मेरी माँ आज नाश्ता नही करेगी कि मेवी आज स्कूल में भूखा होगा सो ..आज के बाद मत कहना के मैं दिल्ली जा रही हूँ तुम तंग करते हो तुमको तंग न करू तो किसको करू .. ऐसे तो आप बोर हो जाऊगी जा ओगी और जल्दी से बूढ़ी भी .और मुझे हमेशा ऐसे ही मम्मी चाहिए जो मुझे डांट भी दे पर मेरी इंग्लिश बुक भी ढूढ़ कर दे जो मुझे सामने पढ़ी होने पर भी नही दिखती ......समझी मेरी माँ ........ अब यह नाश्ता आप खा लेना .आज मानसी का जन्मदिन हैं अभी उसका व्हात्ट्स उप आया हैं कि सब दोस्तों का लंच लेकर आएगी वोह "

अब क्या कहूँ मैं .नाश्ता खा रही हूँ लंच बॉक्स में से और सोच रही हूँ कि सच में बच्चे न हो तो जीवन में रस ही न रहे .. अगले साल जब यह होस्टल जायेगा तो कोई मुझे आवाज़ नही लगाएगा के मेरी बुक कहा गयी ???????
पर देखो न कैसे बिस्तर पर टोवल और कपडे फैला कर गया हैं ..... चलिय शुरू करते हैं अपना दिन


आप सबको भी नोंक- झोंक से भरा प्यारा सा अप्रैल का आखिरी दिन शुभ हो 

Thursday, April 18, 2013

" गर्मी की छुट्टी और माँ


 पीछे मुढ कर देखती हूँ तो याद आती हैं माँ  और मेरी गर्मी की छुट्टिया 
.जमाना अलग था  ..... उन दिनों छुट्टी का मतलब था घर सम्हालना  ..  किताबो से परहेज करना  मैं ठहरी किताबी कीड़ा  .कैसे रह सकती थी किताबो के बिना ..... मेरी सुबह अखबार के साथ होती और शाम  होती किसी न किसी नोवल संग .मांग कर पढना तब कभी बुरा नहीं माना  जाता था , जब भी किसी मित्र रिश्तेदार के यहाँ कोई किताब देख जाती झट से पढने के लिय मांग लिया करते थे  और ना  सुन ने पर बुरा भी लगता था . अब माँ तो माँ होती हैं उनको लगता की उनकी  जिद्दी सी  बेटी किताबे ही पढ़ती रहेगी तो ससुराल मैं क्या करेगी  और हमारा एक ही जवाब होता  ....... हमें कोन सा शादी करनी हैं  हम तो पढ़ेंगे  और नौकरी करेंगे  ... माँ कहती पढना  या नौकरी करना अलग होता हैं  पर घर का काम  हर लड़की को आना चाहिए   चाहे वोह खाना पकाना हो या फटे कपडे  सिलना /करीने से लगाना  . हम सोचते ही रहते  की इस बार यह होगा गर्मियों में . नानी के घर जायेंगे  बुआ के घर जायेंगे  
 पर ..........दिल के अरमान आंसुओ मैं बह गये  .......... और हमें दाखिला दिलाया गया   सिलाई कढ़ाई   की कक्षा में .पाजामा   
 सिलने से शुरुवात हुयी और  जल्दी हमने फ्रॉक सलवार कमीज और थैली वाली कट से पजामी सिलना सीख लिया  अब तो हमें भी मजा आने लगा इनसब में .और अब हम दो दिन में कुछ भी नया सिलकर फिर माँ के सामने जा खड़े होते कि  माँ बाजार से नया कपडा लाना हैं ....अब हर दो- तीन बाद नया कपडा कहा से लाती माँ  ...... हमने सोचा क चलो अब हमारी छुट्टी होगी यहाँ से  और हम फिर से सारी  दोपहर 'शिवानी " के नोवेल्स पढेंगे  .कब से " किस्श्नुली " पूरा नही हो रहा हैं  
 पर कहते हैं माँ तो माँ होती हैं ......माँ ने ताई जी और चाची जी  से कहा कि  जिसने जो सिलाना हो  नीलिमा सिलाई सीख रही हैं  इसको कपडा दे दो  .......बस जी होना क्या था .हम अकेले और हमारे पास थैला भर कपडे  दो दिन में इकठ्ठे हो गये  .... हम माँ की तरफ कातर  दृष्टि से देख रहे थे और माँ विजयी भाव से ............ इस तरह उन छुट्टियों में सीखी सिलाई हमें आज भी याद आती हैं जब हम अपने सूट काटकर उनसे कुशन बनाते हैं ................